Posted in स्वरचित, Hindi Urdu Poems

जिंदा होने के लिए

सांस लेना तो हर शख्स की मज़बूरी है

जिंदा होने के लिए कलेजा भी जरूरी है

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किस की मुहब्बत पूरी हो पायी आज तक

देख,जमीं और आसमां में कितनी दूरी है।

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मैं भी शराफत के लबादो में खंजर रक्खे हूँ

तबाह करने की उनकी तैयारी भी पूरी है।

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उसकी जानिब देख के झुक जाती है

मेरी आँखों की भी जरुर  कुछ मज़बूरी है।

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मेरे लफ्जों के मानी,जब से तू गया है

मेरी लिखी हर एक गजल अधूरी है।

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